Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.88.74: उन दोनों महारथियों के शरीर बाणों के समूहों से छिद गए थे, जिससे वे दोनों महारथी दो पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे, जिन पर बहुत से वृक्ष उगे हुए थे।   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  6.88.74 
बाणजालै: शरीरस्थैरवगाढैस्तरस्विनौ।
शुशुभाते महावीर्यौ प्ररूढाविव पर्वतौ॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों महारथियों के शरीर बाणों के समूहों से छिद गए थे, जिससे वे दोनों महारथी दो पर्वतों के समान प्रतीत हो रहे थे, जिन पर बहुत से वृक्ष उगे हुए थे।
 
Groups of arrows had pierced the bodies of those two mighty warriors, so those two mighty warriors looked like two mountains on which many trees had grown. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)