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ramayan 6.88.72: एक दूसरे को परास्त करने की इच्छा से इन्द्रजीत और लक्ष्मण बार-बार भयंकर युद्ध करने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  6.88.72 
चक्रतुस्तुमुलं घोरं संनिपातं मुहुर्मुहु:।
इन्द्रजिल्लक्ष्मणश्चैव परस्परजयैषिणौ॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
एक दूसरे को परास्त करने की इच्छा से इन्द्रजीत और लक्ष्मण बार-बार भयंकर युद्ध करने लगे।
 
Desirous of defeating each other, Indrajit and Lakshmana repeatedly indulged in fierce fighting. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)