श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  6.88.71 
तयो: कृतव्रणौ देहौ शुशुभाते महात्मनो:।
सुपुष्पाविव निष्पत्रौ वने किंशुकशाल्मली॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों महामनस्वी वीरों के क्षत-विक्षत शरीर वन में लाल पुष्पों से युक्त पत्ररहित पलाश और सेमल के वृक्षों के समान शोभायमान हो रहे थे।
 
The mutilated bodies of those two great-minded heroes looked beautiful in the forest like the leafless Palaash and Semal trees filled with red flowers. 71.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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