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श्लोक 6.88.7  |
अद्य वो मामका बाणा महाकार्मुकनि:सृता:।
विधमिष्यन्ति गात्राणि तूलराशिमिवानल:॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे अग्नि रुई के ढेर को जला देती है, वैसे ही इस विशाल धनुष से छोड़े गए मेरे बाण आज तुम लोगों के शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर देंगे॥ 7॥ |
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| ‘Just as fire burns a heap of cotton, similarly my arrows shot from this huge bow will tear your bodies to pieces today.॥ 7॥ |
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