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ramayan 6.88.7: जैसे अग्नि रुई के ढेर को जला देती है, वैसे ही इस विशाल धनुष से छोड़े गए मेरे बाण आज तुम लोगों के शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर देंगे॥ 7॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.88.7 
अद्य वो मामका बाणा महाकार्मुकनि:सृता:।
विधमिष्यन्ति गात्राणि तूलराशिमिवानल:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे अग्नि रुई के ढेर को जला देती है, वैसे ही इस विशाल धनुष से छोड़े गए मेरे बाण आज तुम लोगों के शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर देंगे॥ 7॥
 
‘Just as fire burns a heap of cotton, similarly my arrows shot from this huge bow will tear your bodies to pieces today.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)