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ramayan 6.88.67: वे दोनों पराक्रमी योद्धा स्वर्ण-पंखयुक्त बाणों से घायल होकर लहूलुहान हो रहे थे। दोनों ही प्रसिद्ध थे और अपनी-अपनी विजय के लिए प्रयत्नशील थे।   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  6.88.67 
सुवर्णपुंखैर्नाराचैर्बलवन्तौ कृतव्रणौ।
प्रसुस्रुवाते रुधिरं कीर्तिमन्तौ जये धृतौ॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों पराक्रमी योद्धा स्वर्ण-पंखयुक्त बाणों से घायल होकर लहूलुहान हो रहे थे। दोनों ही प्रसिद्ध थे और अपनी-अपनी विजय के लिए प्रयत्नशील थे।
 
Those two powerful warriors were bleeding after being wounded by golden-feathered arrows. Both were famous and were striving for their respective victory. 67.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)