श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  6.88.66 
तयो: स भ्राजते शब्दस्तथा समरमत्तयो:।
सुघोरयोर्निष्टनतोर्गगने मेघयोरिव॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
उन दो युद्धोन्मादी वीरों की ध्वनि आकाश में आपस में टकराते हुए दो भयंकर बादलों की गड़गड़ाहट के समान सुन्दर थी।
 
The sound of those two battle-crazy heroes was as beautiful as the thunder of two terrible clouds clashing with each other in the sky. 66.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas