श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.88.65 
तयो: पृथक् पृथग् भीम: शुश्रुवे तलनिस्वन:।
स कम्पं जनयामास निर्घात इव दारुण:॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
बाण चलाते समय उन दोनों की हथेली और धनुष की डोरी से पृथक्-पृथक् भयंकर एवं गर्जनापूर्ण ध्वनि सुनाई देती थी, जो सुनने वालों के हृदय में भयंकर वज्र की ध्वनि के समान कम्पन उत्पन्न कर देती थी ॥65॥
 
While shooting the arrow, a fierce and thunderous sound was heard separately from the palm and bowstring of both of them, which used to create tremors in the hearts of the listeners like the sound of a terrible thunderbolt. 65॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas