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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.88.63 
अस्त्राण्यस्त्रविदां श्रेष्ठौ दर्शयन्तौ पुन: पुन:।
शरानुच्चावचाकारानन्तरिक्षे बबन्धतु:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों ही अस्त्र-शस्त्र के विशेषज्ञ थे और प्रायः अपने अस्त्रों का प्रदर्शन करते रहते थे। वे आकाश में छोटे-बड़े बाणों का जाल बिछाते रहते थे।
 
Both of them were the best experts in weapons and frequently displayed their weapons. They created a net of small and big arrows in the sky. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)