श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  6.88.62 
तयोरथ महान् कालो व्यतीयाद् युध्यमानयो:।
न च तौ युद्धवैमुख्यं क्लमं चाप्युपजग्मतु:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
इन दोनों वीरों ने वहाँ लड़ते हुए बहुत समय बिताया; परन्तु न तो वे युद्ध से विमुख हुए और न ही उन्हें थकान महसूस हुई।
 
Both these heroes spent a lot of time fighting there; but they neither turned away from the battle nor did they feel tired.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas