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श्लोक  6.88.57 
व्यशीर्यत महद्दिव्यं कवचं लक्ष्मणस्य तु।
कृतप्रतिकृतान्योन्यं बभूवतुररिंदमौ॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
इससे लक्ष्मण का दिव्य एवं विशाल कवच भी टूट गया। वे दोनों वीर शत्रु एक-दूसरे के आक्रमण का प्रत्युत्तर देने लगे।
 
Due to this, Lakshman's divine and huge armour was also shattered. Both those brave enemies started responding to each other's attacks. 57
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)