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ramayan 6.88.54: लक्ष्मण के बाणों से इन्द्रजीत का विशाल स्वर्ण कवच टूट गया और रथ की सीट पर बिखर गया, मानो आकाश से तारों का समूह टूटकर गिर पड़ा हो।   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.88.54 
तस्य बाणै: सुविध्वस्तं कवचं काञ्चनं महत्।
व्यशीर्यत रथोपस्थे ताराजालमिवाम्बरात्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के बाणों से इन्द्रजीत का विशाल स्वर्ण कवच टूट गया और रथ की सीट पर बिखर गया, मानो आकाश से तारों का समूह टूटकर गिर पड़ा हो।
 
Indrajit's great golden armour was broken by Lakshman's arrows and scattered across the seat of the chariot as if a cluster of stars had fallen from the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)