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ramayan 6.88.53: युद्ध की इच्छा रखने वाले वीर पुरुष समरांगण में इस प्रकार युद्ध नहीं करते।’ ऐसा कहकर वीर धनुर्धर लक्ष्मण ने उस राक्षस पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.88.53 
नैवं शूरास्तु युध्यन्ते समरे युद्धकाङ्क्षिण:।
इत्येवं तं ब्रुवन् धन्वी शरैरभिववर्ष ह॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
युद्ध की इच्छा रखने वाले वीर पुरुष समरांगण में इस प्रकार युद्ध नहीं करते।’ ऐसा कहकर वीर धनुर्धर लक्ष्मण ने उस राक्षस पर बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
The brave men who desire war do not fight like this in Samarangana.' Saying this, the brave archer Lakshmana started showering arrows on that demon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)