| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध » श्लोक 52 |
|
| | | | श्लोक 6.88.52  | नैवं रणगता: शूरा: प्रहरन्ति निशाचर।
लघवश्चाल्पवीर्याश्च शरा हीमे सुखास्तव॥ ५२॥ | | | | | | अनुवाद | | फिर उन्होंने कहा, 'निश्चर! युद्धभूमि में आने वाले योद्धा इस प्रकार आक्रमण नहीं करते। तुम्हारे ये बाण अत्यन्त हल्के और दुर्बल हैं। ये पीड़ा नहीं पहुँचाते, केवल सुख देते हैं॥ 52॥ | | | | Then he said, 'Nishchar! The warriors who come to the battlefield do not attack like this. These arrows of yours are very light and weak. They do not cause pain, they only give pleasure.॥ 52॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|