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ramayan 6.88.50: इन्द्रजित् का पराक्रम देखकर श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने उसकी परवाह न की और हँसकर कहा - "यह तो कुछ भी नहीं है।" ॥50॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.88.50 
तद् दृष्ट्वेन्द्रजिता कर्म कृतं रामानुजस्तदा।
अचिन्तयित्वा प्रहसन्नैतत् किंचिदिति ब्रुवन्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रजित् का पराक्रम देखकर श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने उसकी परवाह न की और हँसकर कहा - "यह तो कुछ भी नहीं है।" ॥50॥
 
Seeing the feat displayed by Indrajit, Sri Rama's younger brother Lakshmana did not care about it and smilingly said, "This is nothing." ॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)