श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  6.88.47 
यदि ते प्रथमे युद्धे न दृष्टो मत्पराक्रम:।
अद्य त्वां दर्शयिष्यामि तिष्ठेदानीं व्यवस्थित:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
यदि तुमने पूर्व युद्ध में मेरा पराक्रम नहीं देखा है, तो आज मैं तुम्हें दिखा दूँगा। इस समय शान्तचित्त होकर खड़े रहो।॥47॥
 
If you have not seen my prowess in the previous battle, I will show it to you today. Stand calmly at this time.'॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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