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ramayan 6.88.46: 'अथवा ऐसा प्रतीत होता है कि तुम्हें वे सब बातें स्मरण नहीं हैं। ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि तुम यमलोक जाना चाहते हो। इसीलिए मुझे हराना चाहते हो॥ 46॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.88.46 
स्मृतिर्वा नास्ति ते मन्ये व्यक्तं वा यमसादनम्।
गन्तुमिच्छसि यन्मां त्वमाधर्षयितुमिच्छसि॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'अथवा ऐसा प्रतीत होता है कि तुम्हें वे सब बातें स्मरण नहीं हैं। ऐसा स्पष्ट प्रतीत होता है कि तुम यमलोक जाना चाहते हो। इसीलिए मुझे हराना चाहते हो॥ 46॥
 
‘Or it seems that you are not remembering all those things. It seems clear that you want to go to Yamaloka. That is why you wish to defeat me.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)