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ramayan 6.88.45: उस महायुद्ध में मैंने पहले तुम दोनों भाइयों को अपने वज्र के समान तेजस्वी बाणों और राख के समान बाणों द्वारा भूमि पर सुला दिया था। तुम दोनों अपने अग्रिम सैनिकों सहित मूर्छित पड़े थे॥ 45॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.88.45 
युवां खलु महायुद्धे वज्राशनिसमै: शरै:।
शायितौ प्रथमं भूमौ विसंज्ञौ सपुर:सरौ॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
उस महायुद्ध में मैंने पहले तुम दोनों भाइयों को अपने वज्र के समान तेजस्वी बाणों और राख के समान बाणों द्वारा भूमि पर सुला दिया था। तुम दोनों अपने अग्रिम सैनिकों सहित मूर्छित पड़े थे॥ 45॥
 
‘In that great war, I first put you two brothers to sleep on the ground with my arrows as bright as thunderbolts and ashen arrows. You both were lying unconscious along with your frontline soldiers.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)