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ramayan 6.88.44: वहाँ पहुँचकर उसने कठोर शब्दों में उससे कहा - "सुमित्रकुमार! क्या तुम प्रथम युद्ध में मेरे द्वारा दिखाए गए पराक्रम को भूल गए हो? उस दिन मैंने तुम्हें और तुम्हारे भाई को भी बाँध दिया था। उस समय तुम युद्धभूमि में पड़े पीड़ा से तड़प रहे थे।"   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.88.44 
अब्रवीच्चैनमासाद्य पुन: स परुषं वच:।
किं न स्मरसि तद् युद्धे प्रथमे मत्पराक्रमम्।
निबद्धस्त्वं सह भ्रात्रा यदा युधि विचेष्टसे॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ पहुँचकर उसने कठोर शब्दों में उससे कहा - "सुमित्रकुमार! क्या तुम प्रथम युद्ध में मेरे द्वारा दिखाए गए पराक्रम को भूल गए हो? उस दिन मैंने तुम्हें और तुम्हारे भाई को भी बाँध दिया था। उस समय तुम युद्धभूमि में पड़े पीड़ा से तड़प रहे थे।"
 
Reaching there he spoke to him in harsh words - 'Sumitrakumar! Have you forgotten the valour I displayed in the first war? That day I had tied you and your brother too. At that time you were lying in the battlefield and writhing in pain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)