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ramayan 6.88.4-5h: वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित रथ पर बैठे हुए महान धनुर्धर और शक्तिशाली शत्रुओं का नाश करने वाले रावण कुमार ने देखा कि हनुमान जी की पीठ पर आरूढ़ होकर अपने ही तेज से सुशोभित लक्ष्मण जी सूर्योदय के समय बैठे हुए सूर्य भगवान के समान चमक रहे हैं॥4 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  6.88.4-5h 
तं ददर्श महेष्वासो रथस्थ: समलंकृत:।
अलंकृतममित्रघ्नो रावणस्यात्मजो बली॥ ४॥
हनूमत्पृष्ठमारूढमुदयस्थरविप्रभम्।
 
 
अनुवाद
वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित रथ पर बैठे हुए महान धनुर्धर और शक्तिशाली शत्रुओं का नाश करने वाले रावण कुमार ने देखा कि हनुमान जी की पीठ पर आरूढ़ होकर अपने ही तेज से सुशोभित लक्ष्मण जी सूर्योदय के समय बैठे हुए सूर्य भगवान के समान चमक रहे हैं॥4 1/2॥
 
Ravana Kumar, that great archer and powerful destroyer of enemies, sitting on the chariot adorned with clothes and ornaments, saw that Lakshmana, adorned with his own glory, mounted on the back of Hanuman ji, was shining like the Sun God sitting on the sunrise. 4 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)