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ramayan 6.88.35: मानो आकाश में दो ग्रह आपस में टकरा रहे हों, उसी प्रकार वे दोनों वीर परस्पर युद्ध कर रहे थे। उस रणभूमि में वे इन्द्र और वृत्रासुर के समान भयंकर दिखाई दे रहे थे। 35।   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.88.35 
युयुधाते तदा वीरौ ग्रहाविव नभोगतौ।
बलवृत्राविव हि तौ युधि वै दुष्प्रधर्षणौ॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
मानो आकाश में दो ग्रह आपस में टकरा रहे हों, उसी प्रकार वे दोनों वीर परस्पर युद्ध कर रहे थे। उस रणभूमि में वे इन्द्र और वृत्रासुर के समान भयंकर दिखाई दे रहे थे। 35।
 
As if two planets had collided in the sky, in the same way those two heroes were fighting with each other. In that battlefield they appeared as fierce as Indra and Vritrasura. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)