श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.88.34 
विक्रान्तौ बलसम्पन्नावुभौ विक्रमशालिनौ।
उभौ परमदुर्जेयावतुल्यबलतेजसौ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
वे दोनों ही वीर, बलवान, पराक्रमी, परम अजेय, अतुलनीय बल और तेज से युक्त तथा अत्यन्त अजेय थे ॥34॥
 
Both of them were valiant, powerful, mighty, supremely invincible, and possessed of incomparable strength and brilliance, and were extremely invincible. 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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