श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.88.3 
महाप्रमाणमुद्यम्य विपुलं वेगवद् दृढम्।
धनुर्भीमबलो भीमं शरांश्चामित्रनाशनान्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वह भयानक, बलवान राक्षस विशाल, लम्बा, बलवान, वेगवान और भयंकर धनुष तथा शत्रुओं का नाश करने में समर्थ बाण लेकर युद्ध के लिए तैयार था।॥3॥
 
That terrifying, powerful demon was ready for battle, carrying a huge, long, strong, rapid and dreadful bow as well as arrows capable of destroying enemies. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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