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ramayan 6.88.28: 'निश्चर! जो काम तुमने अभी तक किया ही नहीं, उसकी डींगें यहाँ क्यों मार रहे हो? जो काम तुम कह रहे हो, उसे पूरा करो, ताकि मैं तुम्हारी अतिशयोक्तिपूर्ण बातों पर विश्वास कर सकूँ॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.88.28 
अकृत्वा कत्थसे कर्म किमर्थमिह राक्षस।
कुरु तत् कर्म येनाहं श्रद्धेयं तव कत्थनम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
'निश्चर! जो काम तुमने अभी तक किया ही नहीं, उसकी डींगें यहाँ क्यों मार रहे हो? जो काम तुम कह रहे हो, उसे पूरा करो, ताकि मैं तुम्हारी अतिशयोक्तिपूर्ण बातों पर विश्वास कर सकूँ॥ 28॥
 
‘Nishchar! Why are you bragging here for a work that you haven't done yet? Complete the work that you are saying, so that I can believe your exaggerated words.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)