श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.88.27 
वाग्बलं त्यज दुर्बुद्धे क्रूरकर्मन् हि राक्षस।
अथ कस्माद् वदस्येतत् सम्पादय सुकर्मणा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'अरे दुष्टात्मा, क्रूर कर्म करने वाले राक्षस! ये बकवास छोड़। ये सब क्यों कहते हो? करके दिखाओ।'
 
‘You evil-minded demon who commits cruel deeds! Give up this nonsense. Why do you say all this? Show me by doing it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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