श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.88.26 
इति ब्रुवाणं संक्रुद्ध: परुषं रावणात्मजम्।
हेतुमद् वाक्यमर्थज्ञो लक्ष्मण: प्रत्युवाच ह॥ २६॥
 
 
अनुवाद
रावणपुत्र इन्द्रजित के ऐसे कठोर वचन कहने पर उसका अभिप्राय जानने वाले लक्ष्मण ने क्रोधित होकर यह युक्तिसंगत उत्तर दिया - ॥26॥
 
Lakshmana, who knew the intention of Ravana's son Indrajit while he was saying such harsh words, became angry and gave this logical reply - ॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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