श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.88.22 
पत्रिण: शितधारास्ते शरा मत्कार्मुकच्युता:।
आदास्यन्तेऽद्य सौमित्रे जीवितं जीवितान्तका:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सुमित्राकुमार! मेरे धनुष से छूटे हुए तीखे पंखवाले बाण शत्रुओं का अंत करने वाले हैं। वे आज अवश्य ही तुम्हारे प्राण ले लेंगे॥ 22॥
 
Sumitrakumar! The sharp feathered arrows shot from my bow are going to end the life of the enemy. They will surely take your life today.॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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