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ramayan 6.88.21: उसकी यह वीरता देखकर इन्द्रजीत लक्ष्मण के पास गया और जोर से गर्जना करके बोला- 21॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.88.21 
इन्द्रजित् त्वात्मन: कर्म प्रसमीक्ष्याभिगम्य च।
विनद्य सुमहानादमिदं वचनमब्रवीत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसकी यह वीरता देखकर इन्द्रजीत लक्ष्मण के पास गया और जोर से गर्जना करके बोला- 21॥
 
Seeing this bravery of his, Indrajit went to Lakshman and roared loudly and said - 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)