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ramayan 6.88.18: उसके द्वारा छोड़े गए वेगशाली बाण सर्प के विष के समान विषैले थे। वे फुंफकारते हुए सर्पों की भाँति लक्ष्मण के शरीर पर गिरने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.88.18 
तेन सृष्टा महावेगा: शरा: सर्पविषोपमा:।
सम्प्राप्य लक्ष्मणं पेतु: श्वसन्त इव पन्नगा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उसके द्वारा छोड़े गए वेगशाली बाण सर्प के विष के समान विषैले थे। वे फुंफकारते हुए सर्पों की भाँति लक्ष्मण के शरीर पर गिरने लगे।
 
The very fast arrows shot by him were as poisonous as the venom of a snake. They began falling on Lakshman's body like hissing snakes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)