श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.88.16 
यथा बाणपथं प्राप्य स्थितोऽस्मि तव राक्षस।
दर्शयस्वाद्य तत्तेजो वाचा त्वं किं विकत्थसे॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राक्षस! अभी मैं तुम्हारे बाणों के मार्ग में खड़ा हूँ। आज तुम अपना पराक्रम दिखाओ। तुम इतना बढ़ा-चढ़ाकर क्यों कह रहे हो?॥16॥
 
‘Demon! Right now I am standing in the way of your arrows. Today you show your might. Why are you just exaggerating?’॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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