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श्लोक 6.88.15  |
अन्तर्धानगतेनाजौ यत्त्वया चरितस्तदा।
तस्कराचरितो मार्गो नैष वीरनिषेवित:॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| उस दिन युद्ध में छिपने के लिए तुमने जो मार्ग अपनाया था, वह चोरों का मार्ग है। वीर पुरुष उस मार्ग का प्रयोग नहीं करते॥15॥ |
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| The path you took to hide yourself in the battle that day is the path of thieves. Brave men do not use it.॥ 15॥ |
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