| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध » श्लोक 13 |
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| | | | श्लोक 6.88.13  | उक्तश्च दुर्गम: पार: कार्याणां राक्षस त्वया।
कार्याणां कर्मणा पारं यो गच्छति स बुद्धिमान्॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘निश्चर! आपने केवल वाणी द्वारा ही शत्रुओं का वध करने तथा अन्य ऐसे कार्यों की घोषणा की है; परंतु उन कार्यों को पूर्ण करना आपके लिए अत्यन्त कठिन है। जो कर्म द्वारा कर्तव्य से परे चला जाता है, अर्थात् जो बिना कहे, कार्य को पूरा करके दिखलाता है, वही बुद्धिमान पुरुष है॥13॥ | | | | ‘Nishchar! You have only announced through words that you will kill your enemies and other such tasks; but it is very difficult for you to complete those tasks. The one who goes beyond the duties through action, that is, the one who does not say anything but shows by completing the task, is the wise man.॥ 13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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