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ramayan 6.88.12: राक्षसराज के पुत्र की गर्जना सुनकर रघुकुलनन्दन लक्ष्मण क्रोधित हो गए। उनके मुख पर भय का कोई चिह्न नहीं था। उन्होंने रावण के पुत्र से कहा-॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.88: लक्ष्मण और इन्द्रजित की परस्पर रोषभरी बातचीत और घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.88.12 
तच्छ्रुत्वा राक्षसेन्द्रस्य गर्जितं राघवस्तदा।
अभीतवदन: क्रुद्धो रावणिं वाक्यमब्रवीत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज के पुत्र की गर्जना सुनकर रघुकुलनन्दन लक्ष्मण क्रोधित हो गए। उनके मुख पर भय का कोई चिह्न नहीं था। उन्होंने रावण के पुत्र से कहा-॥12॥
 
Hearing the roar of the demon king's son, Raghukulnandan Lakshmana became furious. There was no sign of fear on his face. He said to Ravana's son -॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)