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ramayan 6.86.27: उनके ऐसा कहने पर सारथी अत्यंत वीर इन्द्रजित को रथ पर बैठाकर उस स्थान पर गया, जहाँ पवनपुत्र हनुमान बैठे थे।   |   ramayan सर्ग 6.86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.86.27 
इत्युक्त: सारथिस्तेन ययौ यत्र स मारुति:।
वहन् परमदुर्धर्षं स्थितमिन्द्रजितं रथे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर सारथी अत्यंत वीर इन्द्रजित को रथ पर बैठाकर उस स्थान पर गया, जहाँ पवनपुत्र हनुमान बैठे थे।
 
On his saying so, the charioteer carrying the extremely brave Indrajit seated on the chariot went to the place where Hanuman, the son of the wind, was sitting.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)