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ramayan 6.86.25: इंद्रजीत ने देखा कि वानरराज के पुत्र हनुमान पर्वत के समान अविचल हैं और निर्भय होकर अपने शत्रुओं का संहार कर रहे हैं।   |   ramayan सर्ग 6.86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.86.25 
स ददर्श कपिश्रेष्ठमचलोपममिन्द्रजित्।
सूदमानमसंत्रस्तममित्रान् पवनात्मजम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
इंद्रजीत ने देखा कि वानरराज के पुत्र हनुमान पर्वत के समान अविचल हैं और निर्भय होकर अपने शत्रुओं का संहार कर रहे हैं।
 
Indrajit saw that Hanuman, the son of the monkey king, was as immovable as a mountain and was fearlessly killing his enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)