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ramayan 6.86.20: यह देखकर कि पवनपुत्र हनुमान बड़े वेग से राक्षसों की सेना का संहार कर रहे हैं, हजारों राक्षस उन पर अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.86.20 
विध्वंसयन्तं तरसा दृष्ट्वैव पवनात्मजम्।
राक्षसानां सहस्राणि हनूमन्तमवाकिरन्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर कि पवनपुत्र हनुमान बड़े वेग से राक्षसों की सेना का संहार कर रहे हैं, हजारों राक्षस उन पर अस्त्र-शस्त्रों की वर्षा करने लगे।
 
Seeing that Hanuman, the son of the wind, was destroying the army of demons with great speed, thousands of demons began showering weapons upon him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)