श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  6.86.2-3 
यदेतद् राक्षसानीकं मेघश्यामं विलोक्यते।
एतदायोध्यतां शीघ्रं कपिभिश्च शिलायुधै:॥ २॥
तस्यानीकस्य महतो भेदने यत लक्ष्मण।
राक्षसेन्द्रसुतोऽप्यत्र भिन्ने दृश्यो भविष्यति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, 'लक्ष्मण! शिलारूपी अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित वीर वानरों को तुरन्त ही हमारे सामने काले बादल के समान दिखाई देने वाली राक्षसों की सेना से युद्ध आरम्भ कर देना चाहिए। तुम भी इस विशाल सेना के व्यूह को तोड़ने का प्रयत्न करो। जब यह मोर्चा टूट जाएगा, तब हम यहाँ राक्षसराज के पुत्र इंद्रजीत को देखेंगे।'
 
He said, 'Laxman! The brave monkeys armed with weapons in the form of rocks should immediately start fighting with the army of demons that looks like a dark cloud in front of us. You should also try to break the formation of this huge army. When this front is broken, we will see Indrajit, the son of the demon king, here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)