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ramayan 6.86.18: उस समय पर्वत के समान विशाल और शत्रुओं का दमन करने वाले हनुमान्‌जी ने एक विशाल वृक्ष उखाड़ लिया, जिसे तोड़ना या उखाड़ना अत्यन्त कठिन था॥18॥   |   ramayan सर्ग 6.86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 86: वानरों और राक्षसों का युद्ध, हनुमान्जी के द्वारा राक्षस सेना का संहार और उनका इन्द्रजित को द्वन्द्वयुद्ध के लिये ललकारना तथा लक्ष्मण का उसे देखना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.86.18 
तस्मिंस्तु काले हनुमानरुजत् स दुरासदम्।
धरणीधरसंकाशो महावृक्षमरिंदम:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उस समय पर्वत के समान विशाल और शत्रुओं का दमन करने वाले हनुमान्‌जी ने एक विशाल वृक्ष उखाड़ लिया, जिसे तोड़ना या उखाड़ना अत्यन्त कठिन था॥18॥
 
At that time, Hanuman, who was as huge as a mountain and who suppressed his enemies, uprooted a huge tree, which was very difficult to break or uproot.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)