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स्वमनीकं विषण्णं तु श्रुत्वा शत्रुभिरर्दितम्।
उदतिष्ठत दुर्धर्ष: स कर्मण्यननुष्ठिते॥ १४॥
अनुवाद
रावण का पुत्र इन्द्रजित बड़ा भयंकर योद्धा था। जब उसने सुना कि उसकी सेना शत्रुओं से पीड़ित होकर महान संकट में है, तब वह अनुष्ठान समाप्त होने से पहले ही युद्ध के लिए खड़ा हो गया॥14॥
Ravana's son Indrajit was a very fierce warrior. When he heard that his army was in great distress after being afflicted by the enemies, he stood up for battle even before the ritual was over.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥