श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.85.8 
त्यज राजन्निमं शोकं मिथ्या संतापमागतम्।
यदियं त्यज्यतां चिन्ता शत्रुहर्षविवर्धिनी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! इस शोक और वेदना को, जो तुमने झूठे रूप से प्राप्त की है, त्याग दो; इस चिन्ता को भी अपने मन से निकाल दो; क्योंकि इससे शत्रुओं का आनन्द बढ़ेगा।
 
‘King! Give up this grief and anguish which you have falsely received; also remove this worry from your mind; because it will increase the joy of the enemies.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas