श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.85.5 
यथाऽऽज्ञप्तं महाबाहो त्वया गुल्मनिवेशनम्।
तत् तथानुष्ठितं वीर त्वद्वाक्यसमनन्तरम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! आपने मुझे सेनाओं को अपने-अपने स्थान पर रखने की आज्ञा दी थी, वीर! आपकी आज्ञा पाते ही मैंने वह कार्य पूरा कर दिया॥5॥
 
Mahabaho! You had ordered me to place the armies in their respective places, brave one! I completed that task as soon as I got your order.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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