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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना
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श्लोक 4
श्लोक
6.85.4
राघवस्य वच: श्रुत्वा वाक्यं वाक्यविशारद:।
यत् तत् पुनरिदं वाक्यं बभाषेऽथ विभीषण:॥ ४॥
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर वार्तालाप में कुशल विभीषण ने पहले कही हुई बात दोहराई और यह कहा-॥4॥
On hearing these words of Sri Raghunatha, Vibhishana, who was skilled in conversation, repeated what he had said before and said this -॥ 4॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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