श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.85.34 
स सम्प्राप्य धनुष्पाणिर्मायायोगमरिंदम:।
तस्थौ ब्रह्मविधानेन विजेतुं रघुनन्दन:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
रघुकुल के पुत्र और शत्रुओं का नाश करने वाले लक्ष्मण हाथ में धनुष लेकर ब्रह्माजी के बताए हुए नियम के अनुसार उस कपटी राक्षस को हराने के लिए निकुंभिला नामक स्थान पर पहुँचे॥34॥
 
Laxman, the son of the Raghukul and the destroyer of enemies, taking bow in his hands, reached a place called Nikumbhila to defeat that deceptive demon as per the rule set by Lord Brahma. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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