श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.85.3 
नैर्ऋताधिपते वाक्यं यदुक्तं ते विभीषण।
भूयस्तच्छ्रोतुमिच्छामि ब्रूहि यत्ते विवक्षितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे राक्षसराज विभीषण! जो कुछ आपने अभी कहा, उसे मैं पुनः सुनना चाहता हूँ। कहिए, आप क्या कहना चाहते हैं?॥3॥
 
O demon king Vibhishan! I want to hear again what you have just said. Tell me, what do you want to say?'॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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