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श्लोक 6.85.3  |
नैर्ऋताधिपते वाक्यं यदुक्तं ते विभीषण।
भूयस्तच्छ्रोतुमिच्छामि ब्रूहि यत्ते विवक्षितम्॥ ३॥ |
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| अनुवाद |
| हे राक्षसराज विभीषण! जो कुछ आपने अभी कहा, उसे मैं पुनः सुनना चाहता हूँ। कहिए, आप क्या कहना चाहते हैं?॥3॥ |
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| O demon king Vibhishan! I want to hear again what you have just said. Tell me, what do you want to say?'॥ 3॥ |
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