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ramayan 6.85.29: सबसे पहले उन्होंने अपने बड़े भाई के चरणों में प्रणाम किया, फिर उनकी परिक्रमा करने के बाद वे रावण के पुत्र द्वारा संचालित निकुंभिला मंदिर की ओर बढ़े।   |   ramayan सर्ग 6.85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.85.29 
सोऽभिवाद्य गुरो: पादौ कृत्वा चापि प्रदक्षिणम्।
निकुम्भिलामभिययौ चैत्यं रावणिपालितम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
सबसे पहले उन्होंने अपने बड़े भाई के चरणों में प्रणाम किया, फिर उनकी परिक्रमा करने के बाद वे रावण के पुत्र द्वारा संचालित निकुंभिला मंदिर की ओर बढ़े।
 
First he bowed at the feet of his elder brother, then after circumambulating him he proceeded towards the Nikumbhila temple maintained by Ravana's son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)