श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.85.27 
अद्यैव तस्य रौद्रस्य शरीरं मामका: शरा:।
विधमिष्यन्ति भित्त्वा तं महाचापगुणच्युता:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस विशाल धनुष से छोड़े गए मेरे बाण आज ही उस भयंकर राक्षस के शरीर को छेदकर उसे मृत्यु के मुख में भेज देंगे।॥27॥
 
My arrows shot from this huge bow will today itself pierce the body of that fierce demon and send him to the jaws of death.'॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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