Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.85.26: आर्य! आज मेरे धनुष से छूटे हुए बाण रावण के पुत्र को छेदकर लंका में उसी प्रकार गिरेंगे, जैसे हंस कमलों से भरे हुए सरोवर में उतरते हैं।   |   ramayan सर्ग 6.85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.85.26 
अद्य मत्कार्मुकोन्मुक्ता: शरा निर्भिद्य रावणिम्।
लङ्कामभिपतिष्यन्ति हंसा: पुष्करिणीमिव॥ २६॥
 
 
अनुवाद
आर्य! आज मेरे धनुष से छूटे हुए बाण रावण के पुत्र को छेदकर लंका में उसी प्रकार गिरेंगे, जैसे हंस कमलों से भरे हुए सरोवर में उतरते हैं।
 
Arya! Today the arrows shot from my bow will pierce Ravana's son and fall in Lanka just like swans descend into a lake filled with lotuses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)