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ramayan 6.85.23: यह महाबुद्धिमान राक्षसराज विभीषण उसकी माया को भलीभाँति जानता है, अतः वह भी अपने मन्त्रियों सहित तुम्हारा अनुसरण करेगा।॥23॥   |   ramayan सर्ग 6.85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.85.23 
अयं त्वां सचिवै: सार्धं महात्मा रजनीचर:।
अभिज्ञस्तस्य मायानां पृष्ठतोऽनुगमिष्यति॥ २३॥
 
 
अनुवाद
यह महाबुद्धिमान राक्षसराज विभीषण उसकी माया को भलीभाँति जानता है, अतः वह भी अपने मन्त्रियों सहित तुम्हारा अनुसरण करेगा।॥23॥
 
This great-minded demon king Vibhishana is well aware of her illusions, so along with his ministers he too will follow you.'॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)