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श्लोक 6.85.23  |
अयं त्वां सचिवै: सार्धं महात्मा रजनीचर:।
अभिज्ञस्तस्य मायानां पृष्ठतोऽनुगमिष्यति॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| यह महाबुद्धिमान राक्षसराज विभीषण उसकी माया को भलीभाँति जानता है, अतः वह भी अपने मन्त्रियों सहित तुम्हारा अनुसरण करेगा।॥23॥ |
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| This great-minded demon king Vibhishana is well aware of her illusions, so along with his ministers he too will follow you.'॥ 23॥ |
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