श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  6.85.21-22 
यद् वानरेन्द्रस्य बलं तेन सर्वेण संवृत:।
हनूमत्प्रमुखैश्चैव यूथपै: सह लक्ष्मण॥ २१॥
जाम्बवेनर्क्षपतिना सह सैन्येन संवृत:।
जहि तं राक्षससुतं मायाबलसमन्वितम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! हनुमान्‌ आदि युवकों, रक्षराज जाम्बवान आदि सैनिकों से घिरी हुई वानरराज सुग्रीव की समस्त सेना को साथ लेकर मायाशक्ति से संपन्न राक्षसराज इन्द्रजित का वध करो॥21-22॥
 
Laxman! Take with you all the army of the monkey king Sugriva, surrounded by Hanuman and other youths, Raksharaj Jambavan and other soldiers and kill the demon prince Indrajit, who is endowed with the power of magic. 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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