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ramayan 6.85.2: तत्पश्चात् शत्रु नगरी पर विजय प्राप्त कर चुके श्री राम ने धैर्य धारण किया और हनुमान जी के पास बैठे हुए विभीषण से कहा –   |   ramayan सर्ग 6.85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.85.2 
ततो धैर्यमवष्टभ्य राम: परपुरंजय:।
विभीषणमुपासीनमुवाच कपिसंनिधौ॥ २॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् शत्रु नगरी पर विजय प्राप्त कर चुके श्री राम ने धैर्य धारण किया और हनुमान जी के पास बैठे हुए विभीषण से कहा –
 
Thereafter, Shri Ram, who had conquered the enemy city, gained patience and said to Vibhishana sitting near Hanuman ji –
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)