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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 85: विभीषण के अनुरोध से श्रीरामचन्द्रजी का लक्ष्मण को इन्द्रजित के वध के लिये जाने की आज्ञा देना और सेना सहित लक्ष्मण का निकुम्भिला-मन्दिर के पास पहुँचना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.85.18 
स हि ब्रह्मास्त्रवित् प्राज्ञो महामायो महाबल:।
करोत्यसंज्ञान् संग्रामे देवान् सवरुणानपि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह ब्रह्मास्त्र का ज्ञाता, बुद्धिमान, अत्यन्त मायावी और महाबलशाली है। वह युद्ध में वरुण सहित समस्त देवताओं को अचेत कर सकता है। 18॥
 
He is a knower of Brahmastra, intelligent, very elusive and very powerful. He can stun all the gods including Varuna in battle. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)